Baccho ki Hindi kahaniya : Pari ki kahani - Kahaniya for Hindi

कहानियाँ Baccho ki Hindi kahaniya : Pari ki kahani - Kahaniya for Hindi

Baccho ki Hindi kahaniya : Pari ki kahani - Kahaniya for Hindi with moral

Baccho ki Hindi kahaniya 

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  Baccho ki Hindi kahaniya: परी की कहानी (Pari ki kahani ) - Priya 8 साल की बच्ची थी।  उसकी माँ की मृत्यु हो चुकी थी। Priya रोज अपनी दादी  से परियों की कहानियां सुनती थी।  उसकी सौतेली माँ उसे जरा भी प्यार नहीं करती थी।

एक दिन सभी लोग पिकनिक के पर जाते हैं।  रात को Priya अपने पापा से कहती है, ” पापा मुझे माँ बिलकुल प्यार नहीं करती है।  मैं उनकी हर बात मानती हूँ , लेकिन फिर भी वो मुझसे प्यार नहीं करती हैं। ”

Priya के मासूम सवालों से उसके पापा को बड़ा ही दुःख होता है और वे Priya को समझाते हुए कहते हैं, - बेटा आप उनसे प्यार करते हो न तो देखना एक दिन वो भी आपसे प्यार करने लगेंगे।

पिकनिक के आस - पास का क्षेत्र जादुई रहता है और Priya के माता - पिता सभी इस बात से अनजान रहते हैं। Priya जब अपने भाई सोहन के साथ खेल रही होती है तो उसकी सौतेली माँ उसे डांटते हुए दूर कर देती है।

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Priya उदास होकर जंगल की तरफ चली जाती है।  वह बहुत उदास थी और उसे अपनी माँ की याद भी बहुत आ रही थी। चलते - चलते जंगल में काफी अंदर तक चली गयी।


उसने वहाँ देखा एक तालाब जिसका पानी एकदम साफ है और उसके चारो तरफ रंग बिरंगे फूल खिले हुए हैं और वहाँ एक चमकदार रोशनी बिखरी हुई है।

वह वहाँ बैठकर कभी फूलों को निहारती तो कभी तालाव के स्वच्छ जल को। तभी एक आश्चर्यजनक घटना घटी।  5 उड़नखटोले पर पांच परियां वहा उपस्थित हुई।

उनमें से एक परी जिसने लाल रंग की पोशाक पहनी थी, वह सबसे आगे थी।  थोड़ी दूर आगे बढ़ने पर वे अचानक से रुक गयीं और आपस में बाते करने लगीं।

परी ने कहा, - यहां किसी इंसान के होने की खुशबु आ रही है।  हमें उसे ढूंढना चाहिए। बाकी परियों ने भी  हाँ में हाँ मिलाई और ढूंढने लगे।

थोड़ी ही समय में उन्होंने Priya को देख लिया। Priya उन्हें देखते ही चौंक गयी और डरने लग गयी । परी मुस्कुराते हुए बोली, "डरो मत, मैं परी हूँ। मैं परीलोक में रहती हूँ। तुम यहां कैसे आयी ?"

Priya ने पूरी बात विस्तार से बता दी। परी को बहुत दुःख हुआ। उसने कहा, " मैं तुम्हे कुछ जादुई शक्तियां दे रही हूँ।  जिससे तुम मुझसे जब चाहे बात कर सकती हो और दूसरी शक्तियों  से तुम लोगों की जान बचा सकती हो। यह जंगल बहुत डरावना है। यहाँ एक बड़ा सा राक्षस रहता है। उसे वरदान है कि कोई छोटी बच्ची ही उसे मार सकती है, इसलिए वह धोखे से बच्चों को मार देता है। इसलिए तुम्हे सावधान भी रहना होगा। "

उसके बाद परी ने Priya को कई सारी शक्तियां दे दी और कहा, " अब तुम अपने घर चले जाओ। " . Priya ने यात्रा सूचक यंत्र का प्रयोग किया और उसे बाहर जाने का रास्ता मिल गया।

वह थोड़ी ही आगे बढ़ी थी कि इतने में एक चीता वहाँ आ गया। वह बहुत भूखा था। उसे देखते ही Priya ने माहौल को समझ लिया और उसने अपनी जादुई शक्तियों से पांच शेर प्रकट किये और वे शेर चीते पर टूट पड़े। थोड़ी ही देर में उन्होंने चीते को मार दिया।

कुछ समय में वह फिर से उस स्थान पर आ जाती है जहां वह अपने मम्मी - पापा के साथ ठहरी हुई थी। वहाँ पहुंचने पर Priya के पिता उससे पूछते हैं, " बेटा तुम कहाँ चली गयी थी। मैं तुमको कब से ढूंढ रहा था। "

तब Priya ने कहा," पिता जी अब हमें यहां से चलना चाहिए। यह जगह ठीक नहीं है। "

" क्यों ? क्या हुआ ? तुम इस तरह क्यों बात कर रही हो ? " Priya के पिताजी ने आश्चर्य से पूछा। तभी वहाँ अचानक से अंधेरा हो गया। अचानक हुए अँधेरे से सभी लोग भयभीत होने लगे।

तभी एक लाल रोशनी दिखाई दी और एक भयानक राक्षस प्रकट हुआ। उसे देखकर सबकी हालत खराब हो गयी। वह  एक - एक कर सभी बच्चों को अपने पिजड़े में  बंद  करने लगा।

उसे पता था कि उसकी मृत्यु छोटे बच्चे के हाथो ही लिखी है और इसीलिए वह सभी छोटो बच्चों को मार डालना चाहता था। सभी बच्चों के माता - पिता उस राक्षस से बच्चों को छोड़ने की मिन्नत करने लगे।

लेकिन वह निर्दयी राक्षस किसी की एक नहीं सुन रहा था।  अंत में Priya का नंबर आया। Priya को परियों की बात याद थी। उसने तुरंत ही उस राक्षस पर एक तेज रोशनी फेंकी।

राक्षस को धक्का लगा और वह गिर पड़ा। तभी Priya ने एक जादुई रोशनी से सभी बच्चों को आज़ाद करा लिया।  उसकी इस जादुई शक्तियों से सभी लोग आश्चर्यचकित थे।

अब राक्षस को भी समझ आ गया था कि जिस बच्ची का उसे इन्तजार था वह Priya ही थी। उसने अपने कई रूप धारण करके एक साथ Priya पर आक्रमण किया।

तब Priya ने परी के द्वारा दी हुई शक्ति से रक्षा कवच तैयार कर लिया और उसके बाद उसने जादुई रोशनी से उसके रूपों को नष्ट कर दिया। इस तरह से उसकी और राक्षस की लड़ाई काफी देर तक चली।

उसके बाद Priya ने एक ताकतवर रोशनी का इस्तेमाल करके उस राक्षस को मार दिया। राक्षस के मरते ही वहाँ पर फिर से उजाला हो गया। सभी लोगों ने Priya के सम्मान में तालियां बजाई।

तभी उसकी सौतेली माँ ने उसे गले लगाते हुए बोली, " बेटी मुझे माफ़ कर दो। आज तुमने यहां बहुत लोगों की  जान बचाई है और साथ ही अपने भाई की भी जान बचाई है। मैं हमेशा तुमसे प्यार करुँगी।  ”

Priya भी अपनी सौतेली माँ से लिपट कर रोने लगी।  सभी आखों में आंसू थे लेकिन वह ख़ुशी के आंसू थे।

Kahaniya hindi Moral (शिक्षा) - बच्चों हमें परेशानी आने पर घबराना नहीं चाहिए, खुद कोई strong रखकर समझदारी से परेशानी का हल ढूँढना चाहिए ।

मित्रों यह Priya और परी की कहानी आपको कैसी लगी जरूर बताएं। अपने सुझाव भी मेरे पोस्ट कहानियाँ "Baccho ki Hindi kahaniya : Pari ki kahani - Kahaniya for Hindi, moral." के बारे में शेयर करें।
Thank you 😊

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